Monday, 29 May 2017

Sashural vs Mayaka

*मायका Vs ससुराल*
ससुराल में वो पहली सुबह आज भी याद है। कितना हड़बड़ा के उठी थी, ये सोचते हुए कि देर हो गयी है और सब ना जाने क्या सोचेंगे ?
एक रात ही तो नए घर में काटी है और इतना बदलाव, जैसे आकाश में उड़ती चिड़िया को, किसी ने सोने के मोतियों का लालच देकर, पिंजरे में बंद कर दिया हो।
शुरू के कुछ दिन तो यूँ ही गुजर गए। हम घूमने बाहर चले गए। जब वापस आए, तो सासू माँ की आंखों में खुशी तो थी, लेकिन बस अपने बेटे के लिए ही दिखी मुझे।
सोचा, शायद नया नया रिश्ता है, एक दूसरे को समझते देर लगेगी। लेकिन समय ने जल्दी ही एहसास करा दिया कि मैं यहाँ बहु हूँ। जैसे चाहूं वैसे नही रह सकती। *कुछ कायदा, मर्यादा हैं, जिनका पालन मुझे करना होगा। धीरे धीरे बात करना, धीरे से हँसना, सबके खाने के बाद खाना, ये सब आदतें, जैसे अपने आप ही आ गयीं*।
घर में माँ से भी कभी कभी ही बात होती थी। धीरे धीरे पीहर की याद सताने लगी। ससुराल में पूछा, तो कहा गया -- *अभी नही, कुछ दिन बाद*।
जिस पति ने कुछ दिन पहले ही मेरे माता पिता से, ये कहा था कि *पास ही तो है, कभी भी आ जायेगी, उनके भी सुर बदले हुए थे*।
अब धीरे धीरे समझ आ रहा था, कि शादी कोई खेल नही। इसमें सिर्फ़ घर नही बदलता, बल्कि आपका पूरा जीवन ही बदल जाता है।
आप कभी भी उठके, अपने पीहर नही जा सकते। यहाँ तक कि कभी याद आए, तो आपके पीहर वाले भी, बिन पूछे नही आ सकते।
पीहर का वो अल्हड़पन, वो बेबाक हँसना, वो जूठे मुँह रसोई में कुछ भी छू लेना, जब मन चाहे तब उठना, सोना, नहाना, सब बस अब यादें ही रह जाती हैं।
अब मुझे समझ आने लगा था, कि क्यों विदाई के समय, सब मुझे गले लगा कर रो रहे थे ? असल में मुझसे दूर होने का एहसास तो उन्हें हो ही रहा था, लेकिन एक और बात थी, जो उन्हें अन्दर ही अन्दर परेशान कर रही थी, *कि जिस सच से उन्होंने मुझे इतने साल दूर रखा, अब वो मेरे सामने आ ही जाएगा*।
पापा का ये झूठ कि में उनकी बेटी नही बेटा हूँ, अब और दिन नही छुप पायेगा। उनकी सबसे बड़ी चिंता ये थी, *अब उनका ये बेटा, जिसे कभी बेटी होने का एहसास ही नही कराया था, जीवन के इतने बड़े सच को कैसे स्वीकार करेगा* ?
माँ को चिंता थी कि *उनकी बेटी ने कभी एक ग्लास पानी का नही उठाया, तो इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी कैसे उठाएगी* ?
सब इस विदाई और मेरे पराये होने का मर्म जानते थे, सिवाये मेरे। इसलिए सब ऐसे रो रहे थे, जैसे मैं डोली में नहीं, अर्थी में जा रही हूँ।
आज मुझे समझ आया, कि उनका रोना ग़लत नही था। *हमारे समाज का नियम ही ये है, एक बार बेटी डोली में विदा हुयी, तो फिर वो बस मेहमान ही होती है, घर की। फिर कोई चाहे कितना ही क्यों ना कह ले, कि ये घर आज भी उसका है ? सच तो ये है, कि अब वो कभी भी, यूँ ही अपने उस घर, जिसे मायका कहते हैं, नही आ सकती...!!*
🙏🙏
Please give respect her...
Please treat her like your doughter, Sister... So she wouldn't feel uncomfortable......
Try to understand her situation.....
Help her to adopt the new environment......
Thanks​ and regards
Er. DK Mehta Motivational Speaker 💕

Tuesday, 23 May 2017

BECHARA KISAN !

**पूरी कहानी पढ़ेंगें तो आँख में आंसू आ जाएंगे**
ये कहानी
हर मध्यम व छोटे वर्ग किसान की है.......
कहते हैं..
इन्सान सपना देखता है
तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
किसान के सपने
कभी पूरे नहीं होते
बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है.
बड़ा खुश होते हुए जाता है.
बच्चों से कहता है
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा,
पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा.
पत्नी:–"अरे नही जी..!"
"ये तो अभी ठीक है..!"
"आप तो अपने लिये
जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!"
जब
किसान मंडी पहुँचता है .
ये उसकी मजबूरी है
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता.
व्यापारी
उसके माल की कीमत
अपने हिसाब से तय करते हैं.
एक
साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.
एक
माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.
लेकिन किसान
अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .
खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.
माल तौलाई के बाद
जब पेमेन्ट मिलता है.

वो सोचता है
इसमें से दवाई वाले को देना है, खाद वाले को देना है, मज़दूर को देना है ,
अरे हाँ,
बिजली का बिल
भी तो जमा करना है.

सारा हिसाब
लगाने के बाद कुछ बचता ही नहीं.
वो मायूस हो
घर लौट आता है
बच्चे उसे बाहर ही इन्तज़ार करते हुए मिल जाते हैं.
"पिताजी..! पिताजी..!" कहते हुये उससे लिपट जाते हैं और पूछते हैं:-
"हमारे नये कपडे़ नहीं ला़ये..?"
पिता:–"वो क्या है बेटा..,
कि बाजार में अच्छे कपडे़ मिले ही नहीं,
दुकानदार कह रहा था
इस बार दिवाली पर अच्छे कपडे़ आयेंगे तब ले लेंगे..!"
पत्नी समझ जाती है, फसल
कम भाव में बिकी है,
वो बच्चों को समझा कर बाहर भेज देती है.
पति:–"अरे हाँ..!"
"तुम्हारी साड़ी भी नहीं ला पाया..!"
पत्नी:–"कोई बात नहीं जी, हम बाद में ले लेंगे लेकिन आप अपने जूते तो ले आते..!"
पति:– "अरे वो तो मैं भूल ही गया..!"
पत्नी भी पति के साथ सालों से है पति का मायूस चेहरा और बात करने के तरीके से ही उसकी परेशानी समझ जाती है
लेकिन फिर भी पति को दिलासा देती है .
और अपनी नम आँखों को साड़ी के पल्लू से छिपाती रसोई की ओर चली जाती है.
फिर अगले दिन
सुबह पूरा परिवार एक नयी उम्मीद ,
एक नई आशा एक नये सपने के साथ नई फसल की तैयारी के लिये जुट जाता है.
….
ये कहानी
हर छोटे और मध्यम किसान की ज़िन्दगी में हर साल दोहराई जाती है
Er. DK Mehta Motivational Speaker.

Monday, 22 May 2017

Work for our country

Points to be noted my dear friends and students.
Just try to understand why our country is lagging in Development. Why we are not​ growing like Japan and China.
There is a single reason ... We don't Love our country... We love Money and best facilities.
We take degree from IIT, NIT, AIIMS and IIM and we move to foreign for big Package and best life style.
I know we don't get good package , best facilities and other aminities in India.
But my dear friends
We are only who can change the system.. we can bring revolution, we can create opportunities for others, we can bring happiness for others. We can give the tag of best country in the world.
So that we can proudly say to world that yes we are Unique and Great.
In present condition, 90% best brain of India are in foreign and working for others country.
I am not giving Order to any one but being an Indian I just want to make a request that please try to think about present situation of our country.
There should be patriotism in our Mind, in our veins, in our every heart beat , in our work , in our dream....
Because if you don't have feeling of patriotism.. you are still slave..... Slave of your thinking... Slave of greed and slave of facilities......
Just try to understand
A single person A P J Abdul Kalam Saheb can bring revolution in many field.
We have no. Of best brains like Kalam Saheb but they are working for others country.
It is the time to show real patriotism for our country.
Just change your way of thinking...
Have you thought about #Japan and #China
Why they are so capable....??
There is a single reason....
They love their country and hence they only work for their country.
Being a citizen of India, being a Motivational Speaker, being an enterprenuer, being a real human being and most importantly being a real Patriot of India.....
Please start to think about development of our country, try to understand the situation of our country, try to implement a good system...
We can change the system....
Please come together and start working in that particular field in which you are Master without thinking about any rewards and appreciation from anyone.
Just give your best for betterment of our country.
We can create many Microsoft, Google, Facebook, whatapp and biggest MNC company. Just start and show the power of Indian to the world......
Jai Hind.... Jai Bharat
Sukriya Friends..... If you think... I am right... Please share for development of our country.
You will must share this message if you are a True Indian.....

Thursday, 18 May 2017

Relationships is very important

एक आदमी ने बहोत ही सुंदर लड़की से ब्याह किया।
वो उसे बहोत प्यार करता था। अचानक उस लड़की को
चर्मरोग हो गया कारण वश उसकी सुंदरता कुरूपता में
परिवर्तित होने लगी। अचानक एक दिन सफर में
दुर्घटना से उस व्यक्ति के आँखों की रौशनी चली गई।
दोनों पति-पत्नी की जिंदगी तकलीफों के बावजूद भी एक
दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक चल रही थी।
दिन ब दिन पत्नी अपनी सुंदरता खो रही थी पर पति के
देख न पाने के कारण उनके प्यार में कोई कमी नही आ
रही थी ।
दोनों का दाम्पत्य जीवन बड़े प्यार से चल रहा था।
रोग के बढ़ते रहने के कारण पत्नी की मृत्यु हो गई।
पति को बहोत दुःख हुआ और उसने उसकी यादों के साथ
जुड़ा होने के कारण उस शहर को छोड़ देने का विचार
किया।
उसके एक मित्र ने कहा अब तुम पत्नी के बिना सहारे
अंजान जगह अकेले कैसे चल फिर पाओगे ?
उसने कहा मैं अँधा होने का नाटक कर रहा था,क्यों की
अगर मेरी पत्नी को ये पता चल जाता की मैं देख
सकता हूँ तो उसे अपने रोग से ज्यादा कुरूपता पर दुःख
होता और में उसे इतना प्यार करता था,की किसी भी
हालत में उसे दुखी नही देख सकता था।
वो एक बहोत ही अच्छि पत्नी थी और मैं उसे हमेशा
खुश देखना चाहता था।
सिख:
कभी कभी हमारे लिए भी अच्छा है कि हम कुछ मामलों
में अंधे बने रहें, वही हमारी ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण
होगा।
बहोत वार दांत जीभ को काट लेते हैं फिर भी मुंह में एक
साथ रहते हैं, यही माफ़ कर देने का सबसे बड़ा उदाहरण
है।
मानवीय रिस्ते बिना एक दूसरे के हमेशा अधूरे हैं
,इसलिए हमेशा जुड़े रहें।...
Er. DK Mehta Motivational Speaker 💕

Wednesday, 17 May 2017

Be dedicated and hard-working

किसान और चट्टान
एक किसान था. वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था. उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे.
रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ , एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया.
किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा , और उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.
वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .
” मित्रों “, किसान बोला , ” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है और खेत के बाहर फ़ेंक देना है.”
और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर ये क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता .
Friends, इस किसान की तरह ही हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं और उनसे निपटने की बजाये तकलीफ उठाते रहते हैं. ज़रुरत इस बात की है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें , और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी जिसे हम आसानी से ठोकर मार कर आगे बढ़ सकते हैं.

Thursday, 11 May 2017

My Village, My identity

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है,
और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है  

*ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है 
तू *बच्ची* को भी *हुस्न - ए - बहार* कहता है 

*थक*  गया है हर *शख़्स* काम करते करते 
तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है।

*गांव*  चलो *वक्त ही वक्त*  है सबके पास  !!
तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है

*मौन*  होकर *फोन* पर *रिश्ते* निभाए जा रहे हैं 
तू इस *मशीनी दौर*  को *परिवार* कहता है

जिनकी *सेवा* में *खपा*  देते थे जीवन सारा,
तू उन *माँ बाप*  को अब *भार* कहता है 

*वो* मिलने आते थे तो *कलेजा* साथ लाते थे,
तू *दस्तूर*  निभाने को *रिश्तेदार* कहता है

बड़े-बड़े *मसले* हल करती थी *पंचायतें*
तु  अंधी *भ्रष्ट दलीलों* को *दरबार*  कहता है

बैठ जाते थे *अपने पराये* सब *बैलगाडी* में 
पूरा *परिवार*  भी न बैठ पाये उसे तू *कार* कहता है 

अब *बच्चे* भी *बड़ों* का *अदब* भूल बैठे हैं
तू इस *नये दौर*  को *संस्कार* कहता है  *....

Er. DK Mehta Motivational Speaker 💕

Best Parenting Solution

"बाज़" ऐसा पक्षी जिसे हम ईगल भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को ...